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रवॉंई घाटी के भेडाल (चरवाहा) : परम्परा एवं परिवतन के सन्दर्भ में

Subhash Chandra

Abstract


उत्‍तराखण्‍ड राज्‍य के सीमान्‍तीय जनपद उत्‍तरकाशी में अवस्थित रवॉई घाटी में प्रतिकूल जलवायु एवं अपर्याप्‍त कृषि भूमि के फलस्‍वरूप पशुपालन वहां के ग्रामीणों की जीविकोपार्जन का मुख्‍य साधन jgk है! दो दशक पूर्व तक रवॉई घाटी में पशुओं को ध्‍न सम्‍पदा सामाजिक व आर्थिक प्रतिष्‍ठा का द्योतक माना जाता था !  भेडालों को उत्‍तम चारागाहों की खोज में ग्रीष्‍म ऋतु  में उच्‍च हिमालयी बुग्‍यालों तथा शीत ऋतु में तराई भावर क्षेत्रो में प्रवास करना पडता था !  प्रस्‍तुत शोध पत्र में रवॉई घाटी की पशुचारक संस्‍कृति जीवनचर्या समस्‍याओं एवं पशुलूटपरम्‍परा के साथ ही आधुनिक युग की चराचरी में इनकी परम्‍पराओं का विलोपनके कारण परिवर्तित परम्‍पराओं का किस रूप में निर्वहन किया जा है  इस शोध पत्र में इन तथ्‍यों का निरूपण करने का प्रयास किया गया है क्षेत्रभ्रमण साक्षात्‍कार स्‍थानीय लोक गीत एवं पूर्ववर्ती कार्यां व दस्‍तावेजों को शोध का मुख्‍य  आधर बनाया गया है 


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Copyright (c) 2017 Subhash Chandra