स्त्री एवं स्त्रीवादी साहित्य की भाषा

  • Sunilkumar Yadav वरिष्ठ शोध अध्येता, हिंदी विभाग, कर्नाटक केन्द्रीय विश्वविद्यालय, कलबुर्गी, कर्नाटक – ५८५३६७
  • Suraj Kumar (सहायक अध्यापक) हिंदी विभाग, कर्नाटक केन्द्रीय विश्वविद्यालय, कलबुर्गी, कर्नाटक – ५८५३६७
Keywords: कथा-भाषा, स्त्रीवादी साहित्य की भाषा, स्त्री की भाषा, पुरुष भाषा|

Abstract

साहित्य में कथा-भाषा का रूप, प्रारूप, रंग और गंध एक अलग ही स्वरूप में व्याख्यायित है जबकि इसके इतर व्यक्ति के रूप में स्त्री और पुरुष की भाषा का स्वरूप, कथा भाषा की तुलना में लेखन और बोलचाल के स्तर पर भिन्न होता है| सामान्यतया पुरुष भाषा के मानदंड के आधार पर ही स्त्री-भाषा को विश्लेषित किया जाता रहा है और इसे ही बाद में आदर्श मान लिया गया| पर वर्तमान में यह आवश्यक है की स्त्री-भाषा को भिन्न भाषिक-संरचना में विश्लेषित किया जाये, जिसे पितृसत्तात्मक भाषा के आग्रहों और दवाबों से मुक्त होना अतिआवश्यक है| यदि स्त्री द्वारा कहे-लिखे गये शब्दों पर गौर किया जाये तो ऐसे अनेक अर्थ मिल जाते हैं जो स्त्री-जीवन की अपेक्षा उनके संघर्ष की व्याप्ति और वास्तविकता को गहरे रूप में प्रकट करते हैं| जो इस तथ्य की पुष्टि करता है की स्त्री-भाषा, अपनी प्रकृति और स्वभाव में एक पुरुष भाषा से स्वभावतः भिन्न है|

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