रियाज़ संकल्पना की शुरुवात

  • Sangita Parnerkar Bharati Vidyapeeth (Deemed to be University), Social Sciences Centre, Erandwane, Pune
Keywords: रियाज़, साधना, स्वर, काल, वेद, साधक, परिस्तिथि,

Abstract

यह हैं की, रियाज़ की पद्धति की परंपरा वेद काल पर आधारित होकर भी उसके विकास का क्षेत्र, देश, काल और परिस्तिथि के अनुसार हरेक समय बदलता रहा हैं. अंतः समाज कितना भी बदलता रहे संगीत मैं गुणात्मकता की दिशा की ओर जाने के लिए रियाज़ महत्वपूर्ण हैं. रियाज़ के बिना गुणात्मकता की दिशा प्राप्त नहीं कर सकते.     

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