साधना और रियाज़ में क्या फरक हैं

  • संगीता गुणेश पारनेरकर Bharati Vidyapeeth (Deemed to be University) Pune
Keywords: रियाज़, साधना, स्वर, काल, वेद, साधक, परिस्तिथि, आनंद

Abstract

वेद कालीन संगीत से लेकर आधुनिक काल के संगीत तक साधना और रियाज़ की संकल्पनाए कैसे बदली? रियाज़ का अर्थ क्या हैं और साधना का अर्थ क्या हैं साधना निरपेक्ष हैं और रियाज़ में प्रस्तुतीकरण से मिलने वाली अपेक्षा हैं।    वेद काल में साधना का क्या महत्वा था सामजिक परिस्थितियो के स्थित्यंतर होने के बाद समाज में बदलाव आ चुके और धीरे धीरे साधना रियाज़ में परिवर्तित होने लगी वेद काल में साधना से मिलने वाला मोक्ष प्राप्ति का आनंद आधुनिक काल में रियाज़ करके और प्रस्तुतिकरण करने से आनंद की ओर विकसित हो रहा हैं।     

References

स्वरार्थरमणी, लेखिका- किशोरी अमोणकर, राजहंस प्रकाशन, पुणे। (2009)
भरत और उनका नाट्यशास्त्र, लेखक- ब्रजवल्लभ मिश्र, कनिष्क पब्लिशर्स, संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली।
Published
2018-03-04
Section
Articles